देहरादून, संजीव मेहता। अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में सोशल मीडिया पर उर्मिला सनावर के वायरल वीडियो के बाद उठ रहे सवालों पर आज पूर्व एएसपी और एसआईटी सदस्य शेखर सुयाल सामने आए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने न सिर्फ जांच से जुड़े अहम तथ्यों को साझा किया, बल्कि वीआईपी के नाम को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी पूर्ण विराम लगाया।🔹 एसआईटी जांच पर शेखर सुयाल का बड़ा बयानशेखर सुयाल (वर्तमान में एसपी ग्रामीण हरिद्वार) ने कहा कि —✔ एसआईटी ने जांच पूरी पारदर्शिता और सबूतों के आधार पर की।✔ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने एसआईटी की जांच को सही माना।✔ इसी मजबूत विवेचना के आधार पर तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।उन्होंने कहा कि वनंत्रा रिजॉर्ट में एक-एक सबूत वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा किए गए थे, जिन्हें अदालत में पेश भी किया गया।🔹 अंकिता के दोस्त की एंट्री और आरोपियों की चालजांच में सामने आया कि 15–16 सितंबर 2022 को अंकिता का दोस्त पुष्पदीप रिसॉर्ट में आया था।आरोपियों ने इसी मुलाकात को आधार बनाकर पूरी फर्जी कहानी तैयार की कि अंकिता अपने दोस्तों के साथ चली गई है।18 सितंबर की रात मिसिंग रिपोर्ट लिखवाई गई, जबकि उसी रात लगभग 9 बजे अंकिता की हत्या हो चुकी थी।🔹 22 सितंबर को केस पुलिस के पास आया, 23 सितंबर को एफएसएल टीम पहुंची✔ 22 सितंबर: केस पुलिस को ट्रांसफर✔ उसी शाम: अंकिता का कमरा सील✔ 23 सितंबर सुबह: एफएसएल टीम ने पूरा कमरा रिकॉर्ड किया और साक्ष्य जब्त किएसुयाल ने साफ कहा — “कोई सबूत नष्ट नहीं किया गया।”इन्हीं सबूतों के आधार पर कोर्ट में दोष साबित हुआ।🔹 ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ विवाद पर बड़ा खुलासापूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि —✔ वे अंकिता पर एक्स्ट्रा सर्विस का दबाव बना रहे थे✔ अंकिता ने साफ मना कर दिया✔ इसके बाद ही वारदात को अंजाम दिया गया🔹 वीआईपी कौन था? शेखर सुयाल का खुलासाउर्मिला सनावर के वीडियो के बाद सबसे बड़ा सवाल वही था—वीआईपी कौन?जांच में सामने आया:✔ आरोपियों की चैट में एक “वीआईपी” का जिक्र✔ स्टाफ और गेस्ट एंट्री क्रॉस-चेक की गई✔ जांच टीम नोएडा के व्यक्ति धर्मेंद्र उर्फ प्रधान तक पहुंची✔ उन्होंने बताया कि वे सिर्फ जमीन के एक मामले में आए थे और थोड़ी देर रिसॉर्ट में भोजन किया था✔ उनका किसी भी प्रकार से केस से कोई संबंध नहीं पाया गयाएसआईटी ने सोशल मीडिया में वायरल अन्य नामों की भी जांच की, पर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।🔴 निष्कर्ष (सबसे बड़ा पॉइंट)एसआईटी जांच, सबूत, समय-सीमा और कोर्ट के फैसले — सब कुछ इस ओर इशारा करता है कि आरोपियों ने पूरी प्लानिंग करके वारदात को अंजाम दिया।वीआईपी एंगल या राजनीतिक दबाव जैसी बातें महज भ्रम साबित हुईं। Post Views: 3,389 Post navigation Uttarakhand: नए साल पर भाजपा ने सभी सात मोर्चों की प्रदेश टीम की घोषित, देखें किन्हें मिली जिम्मेदारी 💥 हरिद्वार जमीन घोटाला: निलंबित IAS अधिकारियों को राहत नहीं, बहाली पर बड़ा फैसला टला