देहरादून: संजीव मेहता।उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी दूर है. लेकिन विधायकों में अस्तित्व की लड़ाई को लेकर अभी से रस्साकशी शुरू हो गई है. हैरानी की बात है कि विधायकों की लड़ाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष भाजपा के ही दो विधायकों के बीच में देखने को मिल रही है.

राजधानी देहरादून के दो पड़ोसी विधानसभा रायपुर और धर्मपुर को जोड़ने वाले हरे पुल को लेकर दो विधायकों के बीच तनातनी देखने को मिल रही है. दरअसल, विधायक विनोद चमोली ने अपनी विधानसभा धर्मपुर के अंतर्गत आने वाले दीपनगर मोहल्ले से रायपुर विधानसभा में पड़ने वाले केदारपुरम मोहल्ला को जोड़ने वाले जीर्ण शीर्ण हो चुके हरे पुल के निर्माण को लेकर प्रस्ताव पास किया. लेकिन इस पुल का निर्माण कार्य रायपुर विधायक उमेश काऊ ने मौके पर जाकर रुकवा दिया. इसके बाद यह मामला भड़क गया.

स्थानीय पार्षद दिनेश प्रसाद सती का कहना है कि, विधायक उमेश काऊ द्वारा रुकवाए गए पुल निर्माण के कदम को देखकर वह भी हैरान हैं. जिस तरह से रायपुर विधायक उमेश काऊ को विकास कार्यों के लिए जाना जाता है, ये कदम बिल्कुल उसके विपरीत है. धर्मपुर और रायपुर विधानसभा को जोड़ने के लिए यह सराहनीय कार्य होने जा रहा था. लंबे समय से स्थानीय जनता की मांग इस हरे पुल को लेकर चली आ रही थी. पिछले तीन चार माह से दीपनगर से केदारपुरम को जोड़ने वाले हरे पुल का निर्माण कार्य चल रहा था. लेकिन जिस तरह से अचानक विधायक के द्वारा मौके पर जाकर निर्माण कार्य रुकवाया गया है, ये देख वह भी हैरान हैं.

ऐसा नहीं हो सकता है कि, बिना विधायक के संज्ञान में आए यह निर्माण कार्य हो रहा हो. लेकिन अचानक उनके द्वारा निर्माण कार्य रुकवाया गया, जबकि उन्हें इस निर्माण की पूरी जानकारी पहले ही दी जा चुकी है. इस पुल की जरूरत इस इलाके में बहुत ज्यादा है और जिस तरह से लगातार लोग और वाहनों की भीड़ बढ़ रही है, यह पुल निश्चित तौर से लोगों के लिए राहत देने वाला है. -दिनेश कुमार सती, स्थानीय पार्षद

जानें धर्मपुर विधायक ने क्या कहा: इस मामले पर धर्मपुर विधायक विनोद चमोली का कहना है कि, उन्हें नहीं लगता है कि रायपुर विधानसभा के विधायक उमेश काऊ इस पुल निर्माण के खिलाफ हैं. निश्चित तौर पर विधायक कुछ संदेह में रहे होंगे, जिस पर उन्हें जानकारी नहीं होगी. यही वजह है कि उनके द्वारा अपनी कोई बात रखी गई है. निश्चित तौर से उनकी जो भी बात या फिर संदेह है, उसका समाधान कर दिया जाएगा. हालांकि, विधायक उमेश को क्या संदेह है? यह वही स्पष्ट तौर पर बता सकते हैं. उनके द्वारा ही जनता की मांग को देखते हुए लंबे समय से पुल की मांग की जा रही थी. दीपनगर वाला इलाका उनकी विधानसभा में आता है

रायपुर विधायक ने रखा अपना पक्ष: दूसरी तरफ, दीपनगर हरे पुल का काम रुकवाने के मामले पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ से उनका पक्ष लेने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया. लेकिन ईटीवी भारत से फोन पर बातचीत ने उन्होंने बताया कि,

वह विकास के लिए विनाश नहीं होने देंगे. यह पुल 2013-14 में रायपुर विधानसभा के लिए स्वीकृत हुआ था. उस समय इसका बजट 1 करोड़ 90 लाख था. लेकिन आज इस पुल का निर्माण 3.5 करोड़ रुपए खर्च करके किया जा रहा है. -उमेश काऊ, रायपुर विधायक

दीपनगर से इसे केदारपुरम उनकी विधानसभा से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है, तो क्या उन्हें नहीं पूछा जाएगा? अपनी जेब से 10 लाख रुपए खर्च करके पूर्व में इस पुल का निर्माण किया था. जबकि निर्माण एजेंसी द्वारा उस लोहे को पुल को बिना उनकी संस्तुति के उठा ले गए. निर्माण एजेंसी द्वारा सारा गंदा पानी मंदिर में छोड़ा गया है. पीडब्ल्यूड द्वारा बनाए गए पुश्तों की वजह से बहुत नुकसान हो गया है. इसके अलावा पुल से आगे 12 फीट का रास्ता है और इतना बड़ा पुल बनाने की क्या जरूरत है? -उमेश काऊ, रायपुर विधायक

जिम्मेदार एजेंसी ने कहा: वहीं इस पुल को बना रही कार्यदायी एजेंसी देहरादून निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी ने बताया कि, दीपनगर से केदारपुरम को जोड़ने वाले यह एक डेढ़ लेन हरे मोटर पुल का निर्माण किया जा रहा है. जिसकी लागत 3.50 करोड़ रुपए है. इसके अलावा उन्होंने पूर्व में बने लोहे के पुल के बारे में जानकारी न होने की बात कही.
विभागीय रिकॉर्ड में पुराने पुल को लेकर के इस तरह का कोई जिक्र नहीं है. हालांकि, वह कुछ ही समय पहले ट्रांसफर होकर यहां आए हैं. उनके संज्ञान में भी ऐसा कुछ नहीं है, जिस तरह से दावा किया जा रहा है. यह डेढ़ लेने मोटर पुल धर्मपुर विधानसभा के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है. इसके निर्माण के लिए चार दुकान खाली की गई है और चार अन्य दुकानें इसके जद में आ रही हैं. उनको भी वहां से हटवा दिया गया है. जिसमें किसी के द्वारा भी कोई आपत्ति नहीं की गई है. -नीरज त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता, देहरादून निर्माण खंड