संजीव मेहता। भारत के इतिहास में जब भी बड़े ठगों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले नाम आता है नटवरलाल का। असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव, बिहार के सिवान में जन्मा यह शख्स अपनी चालाकी, नकली पहचान और गजब के आत्मविश्वास से करोड़ों की ठगी कर गया। उसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती।
कौन था नटवरलाल?
1912 में जन्मे नटवरलाल पढ़े-लिखे और बेहद तेज दिमाग के थे। उन्हें कानून और बैंकिंग की अच्छी समझ थी। यही वजह रही कि वह लोगों का भरोसा जीतकर आसानी से उन्हें अपने जाल में फंसा लेते थे।
🔥 नटवरलाल के 10 सबसे चौंकाने वाले किस्से
1️⃣ ताजमहल “बेच” दिया
कहा जाता है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर नकली कागजात तैयार किए और विदेशी खरीदारों को ताजमहल तक बेच डाला।
2️⃣ लाल किला भी नहीं छोड़ा
नटवरलाल ने लाल किले की फर्जी डील कर लोगों से बड़ी रकम ऐंठ ली।
3️⃣ राष्ट्रपति भवन का सौदा
हद तो तब हो गई जब उसने राष्ट्रपति भवन तक बेचने का दावा किया और खरीदारों को यकीन भी दिला दिया।
4️⃣ नकली हस्ताक्षर का उस्ताद
वह बड़े अधिकारियों और बिजनेसमैन के सिग्नेचर इतनी सफाई से कॉपी करता था कि बैंक भी धोखा खा जाते थे।
5️⃣ 50 से ज्यादा नकली पहचान
कभी IAS अधिकारी, कभी मंत्री का सचिव, तो कभी बड़ा उद्योगपति—उसके पास दर्जनों फर्जी नाम और पहचान थीं।
6️⃣ जेल से 8–9 बार फरार
पुलिस उसे पकड़ती जरूर थी, लेकिन वह हर बार नया दांव खेलकर भाग निकलता था।
7️⃣ 84 साल की उम्र में भी चकमा
एक बार कोर्ट ले जाते समय खुद को बीमार और कमजोर दिखाया। व्हीलचेयर पर बैठा और रास्ते में पुलिस को चकमा देकर गायब हो गया।
8️⃣ अमीरों को ठगा, गरीबों की मदद?
कई कहानियां कहती हैं कि वह ठगे हुए पैसों का कुछ हिस्सा गरीबों में बांट देता था। हालांकि इसका पुख्ता सबूत नहीं है।
9️⃣ पुलिस को चिट्ठी लिखकर चिढ़ाता था
बताया जाता है कि फरार रहने के दौरान वह पुलिस को पत्र भेजता था, जिससे उसकी “दिमागी चाल” का अंदाजा लगाया जा सकता है।
🔟 मौत बनी रहस्य
उसकी मौत को लेकर आज भी भ्रम है। कुछ रिकॉर्ड 1996 बताते हैं, जबकि कई लोग दावा करते हैं कि वह बाद में भी जिंदा था।
क्यों सफल था नटवरलाल?
✔️ शानदार पर्सनालिटी
✔️ बेहतरीन बातचीत का हुनर
✔️ कागज और दस्तावेज असली जैसे
✔️ लोगों का मनोविज्ञान समझने की क्षमता
👉 एक बड़ी सीख
नटवरलाल की कहानी सिर्फ ठगी की नहीं, बल्कि अंधविश्वास और बिना जांच भरोसा करने के खतरे की भी याद दिलाती है। आज के डिजिटल दौर में ठगी के तरीके बदल गए हैं, लेकिन सतर्क रहना उतना ही जरूरी है।
आज भी जब कोई बहुत चालाकी से धोखा देता है, तो लोग कहते हैं — “अरे, बड़ा नटवरलाल निकला!”