हरिद्वार, संजीव मेहता । हरिद्वार लोकसभा पर कांग्रेस ने वीरेंद्र रावत को प्रत्याशी बनाया है। वीरेंद्र पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे हैं। हरीश रावत ने उन्हें एक तरह से राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। अल्मोड़ा और हरिद्वार से सांसद रहे चुके हरीश रावत के परिवार से वीरेंद्र दूसरे सदस्य हैं, जिन्हें लोस चुनाव लड़ने का अवसर मिला है। इससे पूर्व 2014 में हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत हरिद्वार सीट से भाग्य आजमा चुकी हैं। लेकिन संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अब बेटे वीरेंद्र के सामने इस मिथक को तोड़ने की चुनौती है कि उत्तराधिकारियों के लिए दिल्ली दूर रही है। फिलहाल तो हरीश रावत हरिद्वार लोकसभा सीट में फस गए है । जबकि हरीश रावत के दोस्त अभी तक किसी अन्य लोस सीटों पर चुनावी रैली या रोड शो के लिए नहीं निकल पाए। आरक्षित अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा चुनाव मैदान में है। अल्मोड़ा में जिगरी यार प्रदीप टम्टा भी हरीश रावत की और देख रहे है। हरिद्वार,”कांग्रेस उठो,लड़ो,जागो ओर जीतो” पूर्व सीएम हरीश रावत से उनकी काफी पुरानी दोस्ती है। एक समय था जब अल्मोड़ा सीट पर हरीश रावत का वर्चस्व था। 1980 में इस सीट पर उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीत कर संसद में कदम रखा। उस समय अल्मोड़ा सीट अनारक्षित थी। इसके बाद यहां से तीन बार चुनाव जीत कर सांसद चुने गए। 1980 व 1984 के चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी को पराजित किया। यही वजह है कि अल्मोड़ा सीट पर चुनाव प्रचार के लिए हरीश की मांग है। उन पर बड़ी जिम्मेदारी हरिद्वार सीट से बेटे वीरेंद्र रावत के प्रचार की भी है। अब देखना यह है कि वह पुत्र मोह में फसे रहते है या उत्तराखंड की दुसरी सीट पर चुनाव प्रचार करने के लिए जाते है। Post Views: 2,048 Post navigation कांग्रेस का मेनिफेस्टो लोकसभा चुनाव का ‘मास्टस्ट्रोक’!, घोषणापत्र की खास बातें – ब्रेकिंग न्यूज़,हरीश रावत की पीएम साथ वायरल फोटो,उमेश कुमार व हरीश रावत आमने सामने