ऋषिकेश: संजीव मेहता। उत्तराखंड के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम और सबसे तेज दौर में पहुंच गया है. रेल विकास निगम लिमिटेड के नेतृत्व में पहाड़ का सीना चीरकर बनाई जा रही सुरंगों का काम रिकॉर्ड रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. रेल प्रोजेक्ट को लेकर रेल विकास निगम लिमिटेड ने बड़ा अपडेट जारी किया है. परियोजना के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सिविल हिमांशु बड़ोनी के अनुसार, प्रोजेक्ट का काम अपनी तय समय सीमा के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है और समय बचाने के लिए खुदाई के साथ-साथ फाइनल लाइनिंग का काम भी समानांतर तरीके से किया जा रहा है. चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर हिमांशु बड़ोनी ने स्पष्ट किया कि ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों का निर्माण एक साथ चल रहा है, ताकि तय समयसीमा में काम पूरा हो सके और चार धाम यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिले. यह रेल नेटवर्क न केवल कनेक्टिविटी को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और चारधाम यात्रा के लिए क्रांति साबित होगा. ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का 125 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी सफर, जिसमें अभी 6 घंटे का समय लगता है, रेल शुरू होने के बाद महज 2 घंटे का रह जाएगा. बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं का यात्रा समय कई घंटे कम होगा. ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग सिर्फ 1.5 घंटे और कर्णप्रयाग तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा, जिससे लंबी सड़क यात्रा और थकान से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी. परियोजना में 16 मुख्य और 13 एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं. किसी भी आपात स्थिति के लिए एस्केप टनल की विश्वस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है. समय बचाने के लिए सुरंगों की खुदाई, लाइनिंग, ट्रैक बिछाने और स्टेशन भवनों के निर्माण का काम एक साथ चलाया जा रहा है, ताकि प्रोजेक्ट तय समयसीमा पर पूरा हो सके. परियोजना के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सिविल हिमांशु बड़ोनी के अनुसार, प्रोजेक्ट का काम अपनी तय समय सीमा के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है और समय बचाने के लिए खुदाई के साथ-साथ फाइनल लाइनिंग का काम भी समानांतर तरीके से किया जा रहा है. चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर हिमांशु बड़ोनी ने स्पष्ट किया कि ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों का निर्माण एक साथ चल रहा है, ताकि तय समयसीमा में काम पूरा हो सके और चार धाम यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिले. यह रेल नेटवर्क न केवल कनेक्टिविटी को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और चारधाम यात्रा के लिए क्रांति साबित होगा. ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का 125 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी सफर, जिसमें अभी 6 घंटे का समय लगता है, रेल शुरू होने के बाद महज 2 घंटे का रह जाएगा. बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं का यात्रा समय कई घंटे कम होगा. ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग सिर्फ 1.5 घंटे और कर्णप्रयाग तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा, जिससे लंबी सड़क यात्रा और थकान से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी. परियोजना में 16 मुख्य और 13 एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं. किसी भी आपात स्थिति के लिए एस्केप टनल की विश्वस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है. समय बचाने के लिए सुरंगों की खुदाई, लाइनिंग, ट्रैक बिछाने और स्टेशन भवनों के निर्माण का काम एक साथ चलाया जा रहा है, ताकि प्रोजेक्ट तय समयसीमा पर पूरा हो सके. Post Views: 995 Post navigation ऋषिकेश में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की गंगा पूजा, लक्ष्मी नारायण मंदिर में किये दर्शन