हरिद्वार, संजीव मेहता। उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा अवैध खनन पर नियंत्रण करने के लिए प्राइवेट कंपनी को ठेके पर दे दिया गया था। जिससे क्रेशर कारोबार पूरी तरह से खत्म हो चुका है कुछ इक्का-दुक्का ही क्रेशर के मालिक हैं जो अपने क्रेशर चला रहे हैं ।
क्रेशर मालिको ने और बताया कि जिस तरह किसानों की फसल बिकती है तो बाजार में रौनक होती है ,पैसे का पहिया बाजार में घूमता तो इन्ही पैसे से बेरोजवारी दूर होती है। इसी तरह हरिद्वार के क्षेत्र में क्रेशर की इंडस्ट्रीज है । अगर वह चलती है तो लाखों लोगो को रोजगार मिलता है,किसानों की तरह जब क्रेशर चलता है तो यही पैसा बाजार में घूमता है तो दुकानदारों को आमदनी होती है । कंस्ट्रक्शन के काम चलते है,किसी का सीमेंट बिकता,हार्डवेयर की दुकानों का व्यापार बढ़ता है । क्रेशर न चलने से खासकर बुग्गी व ट्रॉली वालो के लिए भूखमरी की नौबत आ गई है।
डम्पर वालो की गाड़िया 8,9 महीने से खड़ी खड़ी खराब हो चुकी है,किस्तें दी नही जा रही,जिससे कर्ज बढ़ रहा है । कच्चा माल महंगा मिल रहा है।

और तो और क्रेशरों पर काम न होने से कई लोगो की शादियां तक टूट चुकी है । उधर हरिद्वार के महाराज ने खनन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा रखा है । नदी के बहाव को ठीक करने के लिए सरकार द्वारा ठेका दिया हुआ था। जिस कारण प्रशासन द्वारा ठेका निरस्त कर दिए जाने की सूचना है । लेकिन महाराज को इससे कोई लेना देना नही की अगर नदी के पानी के बहाव को ठीक न किया तो कितने गांवों को बरसात के मौसम में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जरूरत इस बात की है कि उत्ताखण्ड सरकार क्रेशर मालिको के साथ मीटिंग करके इनकी समस्याओं का समाधान करें,क्योकि सरकार को भी क्रेशर इंडस्ट्री से काफी रेवेन्यू का हिस्सा जाता है।जो विकास योजनाओं पर खर्च होता।