गंगा जी में ‘घोड़ा माफिया’ का तांडव! पवित्र धारा में खनन, गंदगी और वसूली—खनन अधिकारी कहां गायब?
हरिद्वार में मां गंगा की पवित्रता बचाने के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं… लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। गंगा की धारा में खुलेआम अवैध खनन, गंदगी और कथित वसूली का खेल चल रहा है—और जिम्मेदार अधिकारी नदारद नजर आ रहे हैं।
हरिद्वार:संजीव मेहता। तीर्थनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित सप्त सरोवर मार्ग पर गंगा की धारा में अवैध खनन का एक चौंकाने वाला खेल सामने आया है। रोजाना सुबह करीब 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक सैकड़ों घोड़े गंगा के भीतर उतरते हैं और बालू-रेता निकालकर किनारे तक लाते हैं।
इसके बाद इस रेते को ट्रैक्टर और छोटे मालवाहक वाहनों के जरिए शहरभर में सप्लाई किया जाता है, जिससे यह साफ है कि यह कोई छोटा काम नहीं बल्कि एक संगठित अवैध नेटवर्क है।
⚠️ गंगा की पवित्रता पर सीधा हमला
इस पूरे खेल का सबसे भयावह पहलू यह है कि ये घोड़े गंगा के भीतर ही मल-मूत्र त्याग रहे हैं, जिससे पवित्र जल दूषित हो रहा है। यही पानी आगे बहकर हर की पौड़ी और अन्य घाटों तक पहुंचता है, जहां हजारों श्रद्धालु रोज स्नान करते हैं।
गंगा किनारे अब घोड़ों की लीद और गंदगी के ढेर नजर आने लगे हैं, जबकि लगातार आवाजाही से घाटों के रास्ते भी टूटते जा रहे हैं।
💰 “गरीबों की रोजी” या माफिया का खेल?
अक्सर इस पूरे मामले को “गरीबों की रोजी-रोटी” बताकर दबा दिया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह असल में खनन माफियाओं का संगठित कारोबार है।
रोजाना दर्जनों गाड़ियां शहर में रेता सप्लाई कर रही हैं—जो इस बात का साफ संकेत है कि यह करोड़ों का अवैध धंधा बन चुका है।
🚨 मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के मुताबिक इस अवैध खनन में पुलिस और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत भी सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि हर घोड़े से 20-20 रुपये वसूले जाते हैं, जो नीचे से ऊपर तक पहुंचाए जाते हैं।
अगर यह सच है तो मामला सिर्फ खनन नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
❓ खनन अधिकारी कहां गायब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध खनन से खनन विभाग आखिर अनजान कैसे है?
👉 क्या खनन अधिकारी मौके पर कभी पहुंचे ही नहीं?
👉 या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
यह चुप्पी खुद में कई बड़े सवाल खड़े करती है।
💸 नमामि गंगे पर सवाल
जब गंगा की सफाई के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो उसी गंगा में इस तरह का खनन और प्रदूषण कैसे जारी है?
क्या यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
⚖️ एनजीटी के आदेशों की धज्जियां
एनजीटी के सख्त आदेशों के बावजूद, जहां धार्मिक सामग्री डालने पर भी जुर्माना है, वहीं यहां घोड़े गंगा में उतरकर खनन और गंदगी फैला रहे हैं—और कार्रवाई शून्य है।
🔥 ध्रुव/पंच लाइन
👉 “गंगा को बचाने के नाम पर खर्च हो रहे करोड़ों… और उसी गंगा में चल रहा खुलेआम खनन—जिम्मेदार आखिर कौन?”
🚨 एंडिंग (तेज सवाल)
क्या जिला प्रशासन और गंगा संरक्षण समिति अब जागेगी?
क्या इस ‘घोड़ा माफिया’ पर कार्रवाई होगी?
या फिर हरिद्वार में गंगा यूं ही भ्रष्टाचार और लालच की भेंट चढ़ती रहेगी?