हरिद्वार, संजीव मेहता। उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस क्यों पिछड़ रही है?बीजेपी के मुकाबले अभी भी संघर्ष करती नजर आ रही कांग्रेससंजीव मेहता की कलम सेउत्तराखंड की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि भारतीय जनता पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है, जबकि कांग्रेस अब भी खुद को पूरी मजबूती के साथ खड़ा करने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है।राज्य की राजनीति में कभी कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा और बराबरी का मुकाबला माना जाता था, लेकिन मौजूदा समय में तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। भाजपा जहां बूथ स्तर तक मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ताओं और आक्रामक रणनीति के साथ लगातार जनता के बीच मौजूद है, वहीं कांग्रेस कई बार केवल बयानबाजी तक सीमित दिखाई देती है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा ने जिस तरह तेजी से फैसले लिए, उसने पार्टी को राजनीतिक रूप से मजबूत किया है। समान नागरिक संहिता (UCC), नकल विरोधी कानून, चारधाम यात्रा व्यवस्थाएं, निवेश सम्मेलन और सख्त प्रशासनिक छवि जैसे मुद्दों को भाजपा लगातार जनता के बीच ले जाने में सफल रही है।भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन माना जाता है। चुनाव हो या सामान्य दिन, पार्टी का कार्यकर्ता लगातार मैदान में सक्रिय दिखाई देता है। गांवों से लेकर शहरों तक भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। यही कारण है कि पार्टी केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राजनीतिक माहौल पर भी पकड़ बनाए रखती है।दूसरी ओर कांग्रेस अभी भी राज्य में स्पष्ट रणनीति और मजबूत नेतृत्व की तलाश में दिखाई देती है। कई बार पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आते रहे हैं। जमीनी स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता भाजपा की तुलना में काफी कमजोर नजर आती है।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता के बीच भरोसा और निरंतर मौजूदगी बनाए रखना है। केवल सरकार की आलोचना करने से राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं होती, बल्कि लगातार जनसंपर्क और मजबूत संगठन ही चुनावी मुकाबले को ताकत देते हैं।उत्तराखंड जैसे छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में संगठन की ताकत बहुत मायने रखती है। भाजपा ने इस बात को समझते हुए लंबे समय से बूथ स्तर पर काम किया है। वहीं कांग्रेस अभी भी कई जगहों पर खुद को व्यवस्थित करने में लगी हुई दिखाई देती है।मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखें तो ऐसा लगता है कि भाजपा फिलहाल मजबूत स्थिति में है और कांग्रेस को मुकाबले में वापसी के लिए काफी मेहनत करनी होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस खुद को किस तरह फिर से मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करती है।फिलहाल उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, जबकि कांग्रेस अभी भी पूरी ताकत के साथ पैरों पर खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।