देहरादून। Sanjiv mehta .डालनवाला क्षेत्र स्थित एस.के. मेमोरियल अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। मृतक की पुत्री सुहानी ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत देकर मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, ऋषिनगर, सहस्त्रधारा रोड निवासी स्वर्गीय दयाराम के 42 वर्षीय पुत्र राजेंद्र को 21 अप्रैल को एस.के. मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के समय डॉक्टरों ने मरीज की बीमारी की गंभीरता और इलाज के दौरान संभावित जोखिमों के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी।
कंसेंट फॉर्म और ICU में भर्ती को लेकर उठाए सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज शुरू करने और मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करने के दौरान उनसे किसी भी प्रकार के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं कराए गए। उनका कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद आईसीयू में भर्ती से संबंधित लिखित जानकारी और जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
रात में अचानक बिगड़ी तबीयत, इंजेक्शन को लेकर भी सवाल

शिकायत में बताया गया है कि दिन के समय मरीज की स्थिति सामान्य थी और उन्होंने नाश्ता व भोजन भी किया था। हालांकि, रात में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक, इस दौरान मरीज को सोडियम बाइकार्बोनेट का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन उन्हें इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों ने मरीज के ब्लड शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव होने का भी जिक्र किया है। उन्होंने दवाइयों के संभावित रिएक्शन की आशंका जताते हुए इलाज के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
मेडिकल फाइल और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस प्रशासन से अस्पताल की पूरी मेडिकल फाइल, दवाइयों का रिकॉर्ड, आईसीयू से जुड़े दस्तावेज और अस्पताल के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो।
मृतक की पुत्री सुहानी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ये सभी आरोप परिजनों की शिकायत पर आधारित हैं। मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक