देहरादून,संजीव मेहता।: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को एजुकेशन सिटी के रूप में जाना जाता रहा है. पहाड़ों की शांत वादियों के बीच बसे इस शहर में देशभर के साथ विदेशों से भी छात्र पढ़ने के लिए आते हैं. नामी स्कूल, प्रतिष्ठित कॉलेज और आधुनिक विश्वविद्यालयों की मौजूदगी ने देहरादून को शिक्षा का मजबूत केंद्र बनाया है. लेकिन पिछले कुछ समय से इस शहर की यही पहचान अब एक नई चुनौती से जूझती नजर आ रही है. छात्रों के बीच बढ़ती हिंसा, गुटबाजी और अनुशासनहीनता ने न केवल शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

देहरादून के हालात इस कदर बदलते दिख रहे हैं कि अब देर शाम के बाद शहर के अलग अलग इलाकों, प्रेमनगर, सेलाकुई या फिर राजपुर रोड से छात्रों के बीच विवाद, मारपीट और हुड़दंग की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. कई मामलों में मामूली कहासुनी गंभीर झगड़े का रूप ले रही हैं. इन घटनाओं ने अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है. साथ ही पुलिस का काम भी बढ़ा दिया है.

इस बढ़ती प्रवृत्ति को गंभीरता से लेते हुए दून पुलिस ने अब सख्त रुख अपना लिया है. पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब छात्रों की किसी भी आपराधिक गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जाएगा. पहले जहां कई मामलों में चेतावनी देकर या चालान काटकर छोड़ दिया जाता था, अब उस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है. पुलिस का साफ संदेश है कि यदि कोई छात्र मारपीट, गुटबाजी, हुड़दंग या किसी भी प्रकार के अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज किया जाएगा.

इस पूरे मामले में गृह सचिव शैलेश बगोली ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि,

राज्य सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है. देहरादून की शिक्षा नगरी की छवि को किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने दिया जाएगा. अब छात्रों को चेतावनी देकर छोड़ने का दौर खत्म हो चुका है. यदि कोई भी छात्र कानून व्यवस्था को प्रभावित करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसका असर उसके भविष्य पर भी पड़ सकता है.
-शैलेश बगोली, गृह सचिव, उत्तराखंड शासन-

शिक्षण संस्थानों को निर्देश: बता दें कि पुलिस द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत सभी शिक्षण संस्थानों, हॉस्टलों और पीजी संचालकों को भी जिम्मेदार बनाया गया है. अब यह केवल छात्रों की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि संस्थानों के प्रबंधन की जवाबदेही भी तय की जाएगी. सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां पढ़ने वाले हर छात्र का पूरा डाटा तैयार करें और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को उपलब्ध कराएं. इसके साथ ही यदि संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार का विवाद होता है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य किया गया है.