देहरादून:संजीव मेहता।उत्तराखंड सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गुरुवार को उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक कारोबारी का निजी सुरक्षा गार्ड अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ सचिवालय परिसर के भीतर पहुंच गया. काफी देर तक उसके परिसर में घूमने के बाद जब सुरक्षा और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी मिली तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया. इसके बाद गार्ड को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई गई. सुरक्षा में एक बड़ी चूक: अक्सर अपनी सुरक्षा व्यवस्था और कड़े प्रवेश नियमों को लेकर चर्चा में रहने वाले उत्तराखंड सचिवालय में गुरुवार को सुरक्षा में एक बड़ी चूक सामने आई. एक कारोबारी के साथ आया उसका निजी सुरक्षा गार्ड अपनी निजी पिस्टल के साथ बिना किसी रोक-टोक के सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गया. सबसे हैरानी की बात यह रही कि प्रवेश के दौरान न तो उसकी व्यक्तिगत तलाशी ली गई और न ही उसके पास मौजूद हथियार की जांच की गई. वाहन में बैठे लोगों की सुरक्षा जांच नहीं की गई: जानकारी के अनुसार एक कारोबारी किसी अधिकारी से मुलाकात के लिए सचिवालय पहुंचा था. उसके साथ उसका निजी सुरक्षा गार्ड भी वाहन में मौजूद था. बताया जा रहा है कि वाहन को टेलीफोन पर किसी अधिकारी से हुई बातचीत के बाद सचिवालय परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई. इसी दौरान वाहन में बैठे लोगों की सुरक्षा जांच नहीं की गई, जिसके चलते निजी सुरक्षा गार्ड अपनी पिस्टल के साथ सीधे सचिवालय के अंदर पहुंच गया. पिस्टल के साथ सचिवालय परिसर में घूम रहा था प्राइवेट गार्ड: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कारोबारी अधिकारी से मिलने के लिए सचिवालय भवन के भीतर चला गया, जबकि उसका निजी सुरक्षा गार्ड बाहर परिसर में काफी देर तक घूमता रहा, जिस स्थान पर मुख्यमंत्री के काफिले की आवाजाही होती है, उसी क्षेत्र के पास वाहन भी खड़ा किया गया. सुरक्षाकर्मी हरकत में आए: इस दौरान किसी भी सुरक्षा कर्मी ने गार्ड से पूछताछ नहीं की और न ही उसके पास मौजूद हथियार के संबंध में जानकारी ली. कुछ समय बाद सुरक्षा कर्मियों और इंटेलिजेंस यूनिट्स को सूचना मिली कि सचिवालय परिसर में एक व्यक्ति हथियार के साथ घूम रहा है. सूचना मिलते ही सुरक्षा अधिकारियों और इंटेलिजेंस से जुड़े कर्मियों में हड़कंप मच गया. तत्काल संबंधित व्यक्ति को घेरकर रोक लिया गया और उसे उसके वाहन के पास ले जाया गया. इसके बाद वाहन की भी गहन जांच की गई. सचिवालय सुरक्षा अधिकारी ने दी जानकारी: पूछताछ के लिए निजी सुरक्षा गार्ड को सचिवालय सुरक्षा अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट के कार्यालय ले जाया गया. वहां उससे सचिवालय में प्रवेश, हथियार साथ लाने और सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर विस्तार से पूछताछ की गई. पूछताछ में गार्ड ने बताया कि वह अपने मालिक के साथ सचिवालय आया था और उसके मालिक किसी अधिकारी से मुलाकात करने गए हैं. उसने यह भी बताया कि वाहन का कोई प्रवेश पास नहीं बनाया गया था, बल्कि किसी अधिकारी से टेलीफोन पर बातचीत के बाद वाहन को अंदर जाने की अनुमति मिली थी. जैसे ही जानकारी मिली कि एक आदमी परिसर में गन के साथ घूम रहा है, इसके बाद सचिवालय के सुरक्षा कर्मी उस व्यक्ति को कार्यालय में लेकर आए. पूछताछ में उस व्यक्ति ने बताया कि वो किसी अधिकारी या बिजनेसमैन के साथ आए है. जिनका पास बना है. ये गाड़ी के अंदर बैठे थे. वैसे हम गाड़ी को अक्सर बाहर से देख लेते है. कई बार गेट पर गाड़ी की पूरी तरह से चेक नहीं हो पाती है. उनके पास छोटी पिस्टल थी, जो गेट पर नजर में नहीं आई. हालांकि जब इस व्यक्ति के पास पिस्टल दिखी तो सुरक्षा कर्मियों को बता दिया गया.-जीवन सिंह बिष्ट, सुरक्षा अधिकारी- प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया कि वाहन के सचिवालय में प्रवेश के समय उसमें बैठे लोगों की सुरक्षा जांच नहीं की गई. इसी वजह से निजी सुरक्षा गार्ड अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ परिसर में पहुंच गया. यदि प्रवेश के समय निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया जाता तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था. मामले की जांच शुरू: घटना की जानकारी मिलते ही सचिवालय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी. सुरक्षा अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट ने भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और यह पता लगाने का प्रयास किया कि प्रवेश के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में चूक आखिर किस स्तर पर हुई. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बिना पास के वाहन को किस अधिकारी के निर्देश पर प्रवेश दिया गया और सुरक्षा जांच क्यों नहीं की गई? गौरतलब है कि उत्तराखंड सचिवालय प्रदेश का सबसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर माना जाता है. यहां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी व्यक्ति का हथियार के साथ बिना समुचित जांच के परिसर में प्रवेश कर जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सचिवालय में आम लोगों के प्रवेश के लिए भी पहचान पत्र, पास और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं अनिवार्य हैं, लेकिन इस घटना ने इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. हालांकि पूछताछ में सामने आया कि सुरक्षा गार्ड के पास मौजूद हथियार लाइसेंसी था, लेकिन सवाल यह है कि यदि सुरक्षा जांच ही नहीं होगी तो किसी भी संवेदनशील परिसर की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है. ऐसे में यह घटना केवल एक व्यक्ति के हथियार लेकर प्रवेश करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश प्रणाली और निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों की ओर भी इशारा करती है. Post Views: 894 Post navigation सिलक्यारा टनल हादसे पर सख्त हुए CM धामी, जांच के आदेश; मृतक के परिजनों को तत्काल मुआवजे