हरिद्वार: संजीव मेहता।धर्मनगरी हरिद्वार में अब ‘बिरयानी’ शब्द को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शहर के प्रमुख चौराहों पर संत समाज और अखाड़ा कार्यकर्ताओं ने अभियान चलाकर ‘वेज बिरयानी’ नाम से बिक रहे खाद्य पदार्थों का विरोध शुरू कर दिया। विरोध के तहत दुकानों और ठेलों पर जाकर ‘वेज पुलाव’ के पोस्टर चिपकाए गए और दुकानदारों से नाम बदलने की अपील की गई।मामला देवपुरा चौक और तुलसी चौक के आसपास संचालित उन ठेलों से जुड़ा है, जहां ‘वेज बिरयानी’ के नाम से खाद्य सामग्री बेची जा रही थी। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर दुकानदारों को बिरयानी शब्द के अर्थ समझाए और कहा कि धार्मिक नगरी में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के नेतृत्व में अभियान के पहले दिन कई संत और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान जूना अखाड़े के संत स्वामी कार्तिक गिरी और कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री भी मौजूद रहे। संतों ने दुकानदारों से संवाद कर धार्मिक नगरी की गरिमा और नगर निगम के नियमों के अनुरूप बोर्ड और नाम लिखने का आग्रह किया।पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि संगठन को लंबे समय से इस संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। उनका कहना है कि ‘बिरयानी’ शब्द मूल रूप से मांसाहारी व्यंजन से जुड़ा माना जाता है, जबकि कई जगह वेज पुलाव को वेज बिरयानी के नाम से बेचा जा रहा है, जिस पर आपत्ति जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी है और इसकी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।वहीं, कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने साफ किया कि संत समाज किसी के रोजगार या व्यापार के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल नामकरण को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है। उन्होंने दुकानदारों से ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ लिखने की अपील की।जूना अखाड़े के संत स्वामी कार्तिक गिरी ने कहा कि व्यापार करने का सभी को अधिकार है, लेकिन धार्मिक नगरी में खाद्य पदार्थों के नामों को लेकर संवेदनशीलता और निगम के नियमों का पालन भी जरूरी है। अब देखना होगा कि संत समाज के इस अभियान के बाद दुकानदार अपने बोर्डों में बदलाव करते हैं या नहीं। Post Views: 2,145 Post navigation हरिद्वार हाईवे पर वॉल्वो बस में आग लगने से राख, यात्रियों का सामान जला; 32 सवारियां सुरक्षित,देखिए वीडियो