Sanjiv mehta।Bhai Dooj 2026: भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक भाई दूज का पर्व इस वर्ष 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को यम द्वितीया, भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर जीवनभर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।इस बार तिथि को लेकर लोगों के मन में 10 या 11 नवंबर की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 11 नवंबर को दोपहर 3:53 बजे तक रहेगी। अपराह्न काल में द्वितीया तिथि की उपस्थिति के चलते भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाना शास्त्रसम्मत बताया गया है।भाई दूज 2026: तिलक का शुभ मुहूर्तभाई दूज पर बहनों द्वारा भाई को तिलक लगाने और पूजा करने का विशेष महत्व है। इस वर्ष पूजा और तिलक के लिए शुभ समय दोपहर 1:10 बजे से 3:20 बजे तक बताया गया है।द्वितीया तिथि प्रारंभ: 10 नवंबर, दोपहर 2:00 बजेद्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर, दोपहर 3:53 बजेतिलक एवं पूजा का शुभ मुहूर्त: 11 नवंबर, दोपहर 1:10 से 3:20 बजे तकपर्व का दिन: बुधवार, 11 नवंबर 2026क्यों मनाया जाता है भाई दूज? जानिए शास्त्रीय मान्यताधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज का पर्व अपराह्न व्यापिनी द्वितीया तिथि में मनाया जाता है। यदि कार्तिक शुक्ल द्वितीया दोपहर के बाद विद्यमान रहती है, तो उसी दिन भाई दूज मनाने का विधान है। इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक कर उनकी खुशहाली और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।ऐसे करें भाई दूज की पूजाभाई दूज के दिन सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल को साफ कर लें और पूजा की थाली सजाएं। थाली में रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई, फल और सुपारी रखें। पूजा स्थल पर चावल के आटे से चौक बनाकर भाई को वहां बैठाएं।शुभ मुहूर्त में भाई के माथे पर तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद भाई की आरती उतारकर उनकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करें। परंपरा के अनुसार बहन भाई को मिठाई और भोजन कराती है। वहीं भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी खुशियों और सुरक्षा का संकल्प लेता है।यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा है भाई दूज का पर्वभाई दूज की परंपरा के पीछे भगवान सूर्य के पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना की एक प्रचलित पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।कथा के अनुसार, यमुना अपने भाई यमराज को बार-बार अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती थीं। लंबे समय बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। भाई को देखकर यमुना अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने यमराज का स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया।बहन के इस स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना ने वर मांगा कि हर वर्ष इस दिन यमराज उनके घर आएं और जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक कर उसकी लंबी उम्र की कामना करे, उसके भाई को अकाल मृत्यु का भय न रहे।यमराज ने बहन को तथास्तु कहकर वरदान दिया। तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया और भाई दूज के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का पर्वभाई दूज केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर भी है। इस दिन बहन का तिलक और भाई का रक्षा संकल्प इस रिश्ते की खूबसूरती को दर्शाता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना स्नान और यम पूजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। Post Views: 922 Post navigation निष्काम सेवा की सुगंध, समर्पण की आभा से सजेगा 79वां वार्षिक संत समागम